Corona ने कितनो को मारा?? चलो आज नकारात्मक नही सकारात्मक बाते करते है,, इसने हमें क्या क्या दिन नही दिखया? न जाने क्या क्या सिखया, इसने तोह हाथ मिलाकर किसी को wish करने से अच्छा हाथ जोड़कर नमस्ते करना बताया,तब ही तोह पूरी दुनिया ने इसे अपनाया। इस ने भारत की विद्यालय का भी मान बढ़ाया जब सबको एक हाथ दूरी करके प्राथर्ना और प्रतिज्ञा का ज्ञान सिखया। इसने सभी घर के सदस्य को एक ही घर में रख दिया। इसने कैसे भारतवासी को अलग- अलग रहकर जोड़ दिया, इसने तो फिर वही इतिहास को दोहराया युवा और नई पीढ़ी को रामायण और महाभारत का फिर से महत्त्व बताया, इसने सभी को अपने अपने घर से इस जंग के योद्धा डॉक्टर ,फौजी,मीडिया और पुलिस के लिए सब से शंख ,घंटी और तालिया बजवाई। इसने फिर से यह बताया कि डॉक्टर ही पृथ्वी पर भगवान का दूसरा रूप है, इसने फिर से पक्षी पशु को सड़क पर ला दिया और इंसान को पिंजरे में कैद कर दिया,और इसने फिर से मछली को पानी में गोता लगाते दिखया। और तोह और अपराध पर पूर्ण विराम लगया है!! @Tushar Pathak
कुदरत का खेल !! किसी ने सही ही कहा है "जब आप के पास सुख है तोह दुःख का आना तय है" यह कहानी है एक मध्य वर्ग परिवार की, एक माँ की वह कैसे रहती है। आज से 10-20 साल पूर्व माँ से ससुराल /रिश्तेदार सब को एक पुत्र की इच्छा होती थी। पुत्र न होने पर दुश्मनों से भी ज्यादा बुरा बर्ताव होता था। उस माँ ने एक नही 5 पुत्र दुनिया में आते ही चले गए। उस माँ के बारे में सोचिए उस पर क्या बीती होगी , जिसको कागज़ पर उतारना किसी के लिए संभव नही। कहते है ना " ऊपर वाला सब की सुनता है, उसने उस माँ की भी सुन ली। माँ के गुण इतना महान होता है कि क्या बोलू , की जब वह अपने बचपन में पापा की यहाँ होती है तोह वहाँ अपने शौक,सुख अपनी इक्छाये पूरी नही कर पाती है, ताकि उनके पापा का पैसा बच सके। बाद में वह शादी करके अपने पति के पास आ जाती है, तोह वहाँ भी वह अपने पति के पैसे बचाती है आने वाले कल के लिए, अपने बच्चो के लिए उनके अच्छे कल के लिए वह अपने सुख को अधूरा छोड़ देती है। ऐसा नही है कि वह अपने सुख भोग नही सकती,पर माँ को अपने सुख पर भोग करना तभी अच्छा लगता हैं जब उसका बेटा अपने पैरों पर खड़ा ...