तु है दरिया सा जिसमें बैठ जाने को मन करता है |
इस दुनिया से दुर जाने को मन करता है |
तेरे टूटे हुऐ दिल पर राज करने को मन करता है |
तेरी आँखो से ऐसे हुई है मोहब्बत मुझे
की रोज उसको चूमने को मन करता है |
सिर्फ उसी मै उतर जाने का मान करता हैं |
तेरी आँखें देख लू तोह चयन सा मिल जाता है
इस बेजान से ज़िन्दगी मैं नया जान सा आ जाता है |
तु बता दे अपनी आँखों की कीमत ,इस ज़िन्दगी का
तोह पता नहीं,पर दुआ करता हूँ अल्लाह से
अगले जन्म मै तेरे इस नशीली आँखो पर मेरा हक हो |
तेरे आँखो का क्या कहना ,मेरे सवालों का ज़वाब
तेरे आँखो मै मिल जाता है |
तेरी आँखों मै अलग ही नशा हैं ,
जो चाह कर भी नहीं उतरता |
अगर होता किसी और चीज़ का नशा
तोह उतर भी जाता ,पर है तेरी आँखों का नशा
जो चाह कर भी नहीं उतरता |
जब भी सोने जाता हूँ तोह तेरा चेहरा नज़र आ जाता है |
न सोने देता है,न जागने देता है ,
सिर्फ तेरी ही आँखों मे डूबा रहता है |
अब तु ही बता दे मैं क्या करू |
--- तुषार पाठक
Awesome poem dear......
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ReplyDeleteMast bhai
ReplyDelete👌👌👌👌
ReplyDeleteI love the eyes 👏👏
ReplyDeleteYe pyar hota he kuch esa hai... Unki tharaf dekho toh aankho Mai Nazar aata hai.... Kisi virane Mai betho toh kagaz pe uttar aata hai... 😢😭....
ReplyDeleteYe sb bhul ja saale...ye alag baat h ki mai khud bhulne ki koshish krta hu....lekin bhul ni pata
ReplyDeleteNice bro keep writing and add some feelings to it
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