Skip to main content

THE EYE I LOVED THE MOST



तु है दरिया  सा जिसमें  बैठ  जाने को मन करता है | 
        इस दुनिया से दुर  जाने को मन करता है | 
तेरे टूटे हुऐ  दिल पर राज करने को मन करता है |
        तेरी आँखो  से ऐसे  हुई है मोहब्बत  मुझे 
की रोज उसको चूमने को मन करता है | 
        सिर्फ उसी मै  उतर जाने का मान करता हैं | 
तेरी आँखें  देख लू तोह चयन  सा मिल जाता है 
       इस बेजान से ज़िन्दगी  मैं  नया  जान सा आ जाता है | 
तु  बता दे अपनी आँखों  की कीमत ,इस  ज़िन्दगी  का 
       तोह पता नहीं,पर दुआ करता हूँ अल्लाह से 
अगले जन्म मै तेरे इस नशीली आँखो  पर मेरा हक हो | 
      तेरे आँखो  का क्या कहना ,मेरे सवालों का ज़वाब 
तेरे आँखो  मै मिल जाता है | 
       तेरी  आँखों  मै  अलग ही नशा हैं ,
जो  चाह कर भी  नहीं उतरता | 
     अगर होता किसी और चीज़ का नशा 
तोह उतर भी जाता ,पर है तेरी आँखों  का नशा   
     जो चाह  कर भी नहीं उतरता | 
जब भी सोने जाता हूँ तोह तेरा चेहरा नज़र आ जाता है | 
     न सोने देता है,न जागने देता है ,
सिर्फ तेरी ही आँखों मे  डूबा रहता है | 
      अब  तु  ही बता दे मैं  क्या करू  | 
                   
                                                             --- तुषार पाठक

Comments

  1. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  2. Ye pyar hota he kuch esa hai... Unki tharaf dekho toh aankho Mai Nazar aata hai.... Kisi virane Mai betho toh kagaz pe uttar aata hai... 😢😭....

    ReplyDelete
  3. Ye sb bhul ja saale...ye alag baat h ki mai khud bhulne ki koshish krta hu....lekin bhul ni pata

    ReplyDelete
  4. Nice bro keep writing and add some feelings to it

    ReplyDelete

Post a Comment